2020 से 2024 तक भारत और राजस्थान में रासायनिक उर्वरकों की खपत का पूरा विश्लेषण

 by Dipansu 

कृषि उत्पादन का एक बड़ा हिस्सा रासायनिक उर्वरकों पर टिका हुआ है। पिछले कुछ वर्षों में, विशेषकर 2020 से 2024 तक, उर्वरक खपत में तेज बदलाव देखने को मिले हैं। कोविड महामारी, अंतरराष्ट्रीय बाजार, सरकार की सब्सिडी नीति, मौसम के पैटर्न और खेती में बदलाव ने इस खपत को प्रभावित किया है।

इस विस्तृत रिपोर्ट में हम भारत और राजस्थान की उर्वरक खपत को गहराई से समझेंगे। विशेष रूप से चार प्रमुख उर्वरकों — Urea, DAP, MOP, NPK Complex — के साल-दर-साल बदलावों को देखा जाएगा।

"A warehouse forklift beside stacked fertilizer bags, representing India and Rajasthan fertilizer consumption analysis from 2020 to 2024."
Fertilizer storage India–Rajasthan consumption trends.



 यह लेख किसानों, शोधकर्ताओं, छात्रों, सरकारी अधिकारियों और कृषि अर्थव्यवस्था को समझने वालों के लिए बेहद उपयोगी है।




1. भारत में उर्वरक खपत (2020–2024)

भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा उर्वरक उपभोक्ता देश है। देश में हर साल लाखों टन Urea, DAP, NPK, MOP और SSP जैसे उर्वरकों की खपत होती है। 2020 के बाद से इन उर्वरकों की खपत में बड़े बदलाव आए।


2020–2024 का बड़ा चित्र

  • Urea की खपत लगातार ऊँचे स्तर पर स्थिर रही।

  • DAP की खपत में 2022–23 से तेज वृद्धि होने लगी।

  • NPK Complex की खपत भी लगातार ऊपर गई।

  • MOP की खपत स्थिर लेकिन कम रही, क्योंकि भारत लगभग 100% MOP आयात करता है।

  • कुल उर्वरक खपत 2020–21 में 630 LMT के आसपास थी, जो 2023–24 में लगभग 601 LMT रही।

 

 भारत में उर्वरकों की खपत (LMT में)

वर्ष                         Urea                     DAP                  MOP                  NPK Complex
2020-21350.51
2021-22341.73
2022-23357.26105.3116.32107.31
2023-24357.81109.7316.45116.80

ऊपर के आंकड़े दिखाते हैं कि भारत में उर्वरक खपत में कोई बहुत बड़ा उछाल नहीं है, लेकिन बदलाव स्थिर और संतुलित ढंग से होते रहे।




 2. राजस्थान में उर्वरक खपत (2020–2024)

राजस्थान भारत का सबसे बड़ा राज्य है, लेकिन यहाँ खेती की स्थिति बाकी राज्यों से अलग है। रेतीली मिट्टी, कम वर्षा, सिंचाई पर निर्भरता और फसल पैटर्न उर्वरक खपत को अनोखे ढंग से प्रभावित करते हैं।

राजस्थान में क्या खास हुआ?

  • Urea की खपत लगातार बढ़ी है।

  • DAP की खपत 2021–22 के बाद जोरदार तरीके से बढ़ी।

  • MOP की खपत लगातार कम हुई।

  • NPK की खपत लगभग दोगुनी हो गई।

 


 राजस्थान में उर्वरकों की खपत (LMT में)

वर्ष                      Urea              DAP              MOP             NPK
2020-2123.219.170.320.64
2021-2222.596.100.241.20
2022-2325.178.470.140.72
2023-2425.399.370.151.08

राजस्थान में उर्वरक खपत का पैटर्न दिलचस्प है क्योंकि यहाँ उर्वरक उपयोग का सीधा संबंध मिट्टी की पोषक-घटती क्षमता से है। नाइट्रोजन की कमी सबसे ज्यादा होने के कारण Urea की मांग हमेशा अधिक रहती है।




 3. भारत और राजस्थान के आंकड़ों की आपस में तुलना

अब देखते हैं कि भारत और राजस्थान दोनों में 2020–2024 के बीच कौन से उर्वरक में अधिक बदलाव हुआ।


 भारत बनाम राजस्थान — 2020–2024 में बदलाव

श्रेणी                     भारत की खपत में बदलाव                      राजस्थान की खपत में बदलाव
Ureaहल्की वृद्धिलगातार वृद्धि
DAPवृद्धितेज वृद्धि
MOPस्थिरलगातार गिरावट
NPKतेज वृद्धिदोगुनी वृद्धि

स्पष्ट रूप से, राजस्थान में सबसे बड़ा बदलाव NPK और DAP उर्वरकों में देखा गया है।




4. उर्वरक खपत क्यों बढ़ी या घटी?





4.1. सरकार की सब्सिडी नीति

Urea को भारी सब्सिडी मिलने के कारण इसकी कीमत स्थिर रहती है, इसलिए किसान इसे अधिक मात्रा में लेते हैं। इसी तरह 2022 में सरकार ने DAP पर सब्सिडी बढ़ाई, जिससे DAP की खपत भी बढ़ गई।

4.2. खेती के तरीकों में बदलाव

डबल क्रॉपिंग और गहन खेती (Intensive Farming) बढ़ने से उर्वरकों की मांग भी बढ़ी।

4.3. Soil Health Cards का प्रभाव

Soil Health Card कार्यक्रम से किसानों में जागरूकता आई है, जिससे वे Urea के साथ-साथ DAP और NPK का भी प्रयोग करने लगे।

4.4. आयात लागत

MOP और DAP की अंतरराष्ट्रीय कीमतें बढ़ने से कुछ वर्षों में इनकी खपत पर असर पड़ा। 2021 के बाद MOP की खपत लगातार कम होती गई।

4.5. मौसम का बदलता पैटर्न

कम बारिश वाले क्षेत्रों में किसान Urea का उपयोग ज्यादा करते हैं, क्योंकि यह तुरंत असर करता है।




 5. उर्वरक खपत का कृषि और अर्थव्यवस्था पर असर


5.1. उत्पादन बढ़ा

संतुलित उर्वरक उपयोग से गेहूं, चावल, बाजरा, गन्ना आदि की पैदावार में सुधार हुआ।

5.2. मिट्टी की सेहत पर असर

अत्यधिक Urea उपयोग से मिट्टी की उर्वरता कम होती है। यही कारण है कि सरकार NPK और जिंक/सल्फर आधारित उर्वरकों को बढ़ावा दे रही है।

5.3. लागत बढ़ी

DAP और MOP जैसी आयात आधारित उर्वरकों की कीमतें बढ़ने से किसानों की लागत में वृद्धि हुई।

5.4. राजस्थान में फसल विविधता का प्रभाव

राजस्थान में गेहूं, सरसों और बाजरा की खेती बढ़ने से DAP और NPK की मांग भी बढ़ी है।




6. 2025 और आगे का रुझान

भविष्य में कई बड़े बदलाव संभावित हैं:

6.1. Urea की खपत धीरे-धीरे कम होगी

सरकार Nano Urea को बढ़ावा दे रही है। इससे पारंपरिक Urea का उपयोग 25% तक कम हो सकता है।

6.2. DAP और NPK का उपयोग और बढ़ेगा

तेलहन और दलहन फसलों में यह उर्वरक अधिक प्रभावी है।

6.3. MOP का भविष्य अंतरराष्ट्रीय बाजार पर निर्भर

रूस-यूक्रेन विवाद का असर अभी भी पोटाश की कीमतों पर पड़ रहा है।

6.4. राजस्थान में NPK का उपयोग दोगुना हो सकता है

यहाँ की मिट्टी में कई पोषक तत्वों की कमी है, इसलिए Balanced Fertilisation ही भविष्य है।




निष्कर्ष

2020 से 2024 तक का उर्वरक डेटा साफ दिखाता है कि:

  • भारत में कुल खपत स्थिर है लेकिन DAP और NPK की मांग तेजी से बढ़ रही है।

  • राजस्थान में Urea और DAP की खपत लगातार बढ़ी है।

  • Balanced fertilisation की तरफ झुकाव बढ़ता दिख रहा है।

  • सरकार की नीतियाँ, मौसम, फसल पैटर्न और आयात-निर्भरता उर्वरक खपत को सीधे प्रभावित करते हैं।

यह रिपोर्ट बताती है कि आने वाले समय में उर्वरकों की खपत का ट्रेंड अधिक स्थिर, संतुलित और वैज्ञानिक दृष्टिकोण पर आधारित होगा।

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