राजस्थान में फसल बीमा योजना की सच्चाई – किसानों का नुकसान, कंपनियों का मुनाफा
by Dipansu
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| Sowing dreams, harvesting futures. |
राजस्थान की धरती पर खेती एक संघर्ष है। कभी मानसून धोखा देता है, कभी ओले गिर जाते हैं। किसान उम्मीद करते हैं कि फसल बीमा योजना उनके नुकसान की भरपाई करेगी। लेकिन असली सवाल यह है — बीमा योजना से फायदा आखिर किसे हो रहा है, किसानों को या कंपनियों को?
फसल बीमा योजना का उद्देश्य और हकीकत
केंद्र सरकार ने 2016 में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) शुरू की थी। इस योजना का दावा था कि हर किसान को प्राकृतिक आपदा से सुरक्षा मिलेगी। राज्य और केंद्र दोनों प्रीमियम में हिस्सेदारी करते हैं, जबकि बाकी अंश किसान देते हैं। योजना का संचालन विभिन्न निजी और सरकारी बीमा कंपनियाँ करती हैं, जिन्हें हर सीजन के लिए ज़िले-वार जिम्मेदारी दी जाती है।
राजस्थान जैसे विशाल राज्य में यह योजना सबसे ज़्यादा प्रभावी मानी जाती है — लेकिन ज़मीनी हकीकत कुछ और कहती है।
1. राजस्थान में कौन-सी कंपनियाँ किसानों का बीमा कर रही हैं?
राज्य में रबी 2024-25 सीजन के लिए कुल 7 बीमा कंपनियाँ सक्रिय हैं। यह वही कंपनियाँ हैं जो पिछले कुछ वर्षों से राजस्थान सरकार और कृषि मंत्रालय की साझेदारी में काम कर रही हैं। लोकसभा के आधिकारिक उत्तर (Annexure-III, 9 जुलाई 2021) और PMFBY पोर्टल के रिकॉर्ड के अनुसार राजस्थान के जिलों में यह कंपनियाँ जिम्मेदार हैं:
| कंपनी का नाम | मुख्य कार्य क्षेत्र (जिले) |
|---|---|
| Bajaj Allianz General Insurance Co. Ltd. | अजमेर, नागौर, टोंक आदि |
| SBI General Insurance Co. Ltd. | अलवर, जयपुर, सीकर |
| Reliance General Insurance Co. Ltd. | बांसवाड़ा, डूंगरपुर, उदयपुर |
| Universal Sompo General Insurance Co. Ltd. | जोधपुर, जैसलमेर |
| Future Generali India Insurance Co. Ltd. | कोटा, बारां |
| HDFC Ergo General Insurance Co. Ltd. | भीलवाड़ा, चित्तौड़गढ़ |
| Agriculture Insurance Company of India Ltd. (AIC) | बीकानेर, चुरू, श्रीगंगानगर |
(स्रोत: लोकसभा प्रश्न संख्या 317, दिनांक 09-07-2021, pmfby.gov.in)
राजस्थान में बीमा कंपनियों की यह संरचना लगभग हर साल निविदा प्रक्रिया के बाद तय होती है। यानी अगर किसी कंपनी ने खराब प्रदर्शन किया या क्लेम में देरी की, तो अगले सीजन उसका ज़िला बदल सकता है।
2. किसानों को कितना मिला, और कंपनियों ने कितना कमाया?
योजना के शुरुआती वर्षों में किसानों को बड़े वादे किए गए थे, लेकिन सरकारी आंकड़े बताते हैं कि कई बार क्लेम वितरण और प्रीमियम संग्रह में भारी अंतर रहा है।
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कृषि मंत्रालय की 2023-24 की रिपोर्ट के अनुसार, राजस्थान में 9.7 लाख किसानों को कुल ₹ 2,866 करोड़ का क्लेम भुगतान किया गया।
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लेकिन उसी अवधि में बीमा कंपनियों ने किसानों और सरकार से करीब ₹ 4,200 करोड़ का प्रीमियम वसूला।
यानी लगभग ₹ 1,300 करोड़ की राशि का संतुलन कंपनियों के पक्ष में रहा।
(स्रोत: PIB – Government of India, 2024)
अगर इसे लाभ-हानि के नजरिए से देखें, तो बीमा कंपनियों ने राजस्थान में प्रीमियम से अधिक राशि प्राप्त की जबकि क्लेम भुगतान अपेक्षाकृत कम हुआ।
3. कंपनियों के वार्षिक लाभ का विश्लेषण
अब बात करते हैं कि इन बीमा कंपनियों ने अपने कुल मुनाफे में कृषि बीमा से कितना कमाया। यद्यपि कंपनियाँ अपने सेगमेंट-वार लाभ अलग नहीं दिखातीं, फिर भी उनकी वार्षिक रिपोर्टें संकेत देती हैं कि कृषि बीमा कारोबार लाभदायक रहा है।
| कंपनी | FY 2023-24 का शुद्ध लाभ (₹ करोड़ में) | स्रोत |
|---|---|---|
| HDFC Ergo General | 789 करोड़ | Annual Report 2024 |
| SBI General | 712 करोड़ | IRDAI filing 2024 |
| Bajaj Allianz General | 1,487 करोड़ | Annual Report 2024 |
| Reliance General | 358 करोड़ | Reliance Capital filing 2024 |
| Future Generali India | 282 करोड़ | Company report 2024 |
| Universal Sompo | 154 करोड़ | Audited Financials 2024 |
| AIC of India | 442 करोड़ | Ministry of Finance 2024 |
इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि जब किसान नुकसान की भरपाई के इंतजार में हैं, तब कंपनियाँ मुनाफे में हैं।
4. सरकार की रिपोर्टें क्या कहती हैं?
राज्य सरकार और केंद्र सरकार दोनों ने माना है कि योजना के क्रियान्वयन में पारदर्शिता की कमी रही है।
लोकसभा में प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार, कई जिलों में किसानों को क्लेम का भुगतान 90 दिन की समयसीमा से अधिक देरी से मिला।
कृषि मंत्रालय की एक समीक्षा रिपोर्ट (2023) में उल्लेख है कि “बीमा कंपनियाँ समय पर सर्वे नहीं करतीं, जिससे किसानों के भुगतान में विलंब होता है।”
वहीं, बीमा कंपनियाँ तर्क देती हैं कि उन्हें प्रीमियम का हिस्सा राज्य और केंद्र से देर से मिलता है, जिससे भुगतान प्रभावित होता है।
लेकिन वास्तविकता यह है कि किसानों के लिए बीमा योजना अब भी एक अनिश्चित सौदा है — हर सीजन में आवेदन, दस्तावेज़ और क्लेम की प्रक्रिया नई मुश्किलें लेकर आती है।
5. क्या फसल बीमा योजना किसानों के लिए लाभकारी रही?
PMFBY का उद्देश्य किसानों को सुरक्षा देना था, लेकिन राजस्थान में यह योजना कई बार कागज़ी सुरक्षा साबित हुई है।
कृषि विभाग की आंतरिक रिपोर्ट बताती है कि राजस्थान के कुछ जिलों में किसानों के बीमा दावों में 25 % से ज़्यादा फाइलें अधूरी रह गईं।
कई किसानों ने फसल हानि के बावजूद दावा नहीं किया क्योंकि सर्वेक्षण टीम मौके पर पहुँची ही नहीं।
इस बीच बीमा कंपनियों ने प्रीमियम और सरकारी सहायता से अपने कारोबार का विस्तार किया — विज्ञापन, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और नई बीमा योजनाओं में निवेश किया गया।
यह दर्शाता है कि फसल बीमा कंपनियों के लिए व्यापार बन चुका है, जबकि किसानों के लिए यह अभी भी भरोसे का विषय है।
6. किसानों की शिकायतें और सरकार की ‘पोल’
राजस्थान के कई जिलों में किसानों ने आरोप लगाया कि बीमा कंपनियाँ क्लेम अस्वीकृत करने के लिए तकनीकी कारण बताती हैं।
कभी कहा गया “खेत GPS सीमा के बाहर है”, तो कभी “रजिस्ट्रेशन देर से हुआ।” राज्य सरकार ने 2024 की रबी सीजन में 1,200 से अधिक ऐसी शिकायतें दर्ज कीं, जिनमें किसानों ने कहा कि उन्हें 0 रुपये क्लेम मिला, जबकि पड़ोसी किसान को उसी नुकसान पर भुगतान हुआ।
इस पर कृषि मंत्री ने विधानसभा में स्वीकार किया कि “बीमा कंपनियों के खिलाफ 43 जिलों में कार्रवाई की सिफारिश की गई है।”
यह अपने-आप में बड़ा संकेत है कि योजना की क्रियान्वयन-स्तर पर निगरानी कमजोर है।
7. समाधान क्या हो सकता है?
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राज्य-स्तर पर बीमा निगरानी प्रकोष्ठ – हर ज़िले में किसानों की शिकायतें ऑनलाइन ट्रैक हों।
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कंपनी-वार प्रदर्शन रिपोर्ट सार्वजनिक हो – किस कंपनी ने कितना प्रीमियम लिया और कितना क्लेम दिया, यह जनता के लिए पारदर्शी बने।
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कृषि डेटा-आधारित बीमा मॉडल – सैटेलाइट डेटा और मौसम सेंसर से नुकसान का स्वचालित आकलन हो, ताकि क्लेम में मानव हस्तक्षेप कम हो।
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किसानों को डिजिटल साक्षरता प्रशिक्षण – ताकि वे समय पर रजिस्ट्रेशन और क्लेम कर सकें।
निष्कर्ष
राजस्थान में फसल बीमा योजना किसानों के लिए सुरक्षा कवच जरूर है, लेकिन इस कवच में कई दरारें हैं।
सात कंपनियाँ — Bajaj Allianz, SBI General, Reliance General, Universal Sompo, Future Generali, HDFC Ergo और AIC — राज्य के अलग-अलग जिलों में किसानों की फसल का बीमा कर रही हैं।
कंपनियों की सालाना रिपोर्ट दिखाती है कि उनका मुनाफा लगातार बढ़ रहा है, जबकि किसानों के क्लेम भुगतान और संतुष्टि दर में सुधार नहीं हो सका है।
सरकार को अब यह तय करना होगा कि फसल बीमा योजना केवल कंपनियों के लिए लाभकारी सौदा न बन जाए, बल्कि किसानों के लिए सच्ची सुरक्षा कवच साबित हो।
संदर्भ (Sources)
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Pradhan Mantri Fasal Bima Yojana Portal – pmfby.gov.in
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Lok Sabha Question No. 317 (09 July 2021) – sansad.in
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Press Information Bureau Release – “PMFBY benefits 9.7 lakh farmers in Rajasthan” (2024)
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Annual Reports 2024 of Bajaj Allianz, SBI General, HDFC Ergo, AIC of India

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