किसान Weather Parametric Insurance कैसे लें? स्टेप-बाय-स्टेप प्रक्रिया और पूरा फायदा
by Dipansu
भारत में बदलते मौसम का सबसे सीधा और गहरा असर किसानों पर पड़ता है। कभी बहुत ज्यादा बारिश, कभी बिल्कुल सूखा, कभी तेज हवाएँ, तो कभी पाला—इन सभी स्थितियों से फसल को नुकसान होता है। ऐसी चुनौतियों में Weather Parametric Insurance किसानों के लिए नई और आधुनिक सुरक्षा बनकर उभर रहा है।
यह बीमा पारंपरिक Crop Insurance से बिल्कुल अलग है क्योंकि इसमें—
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सर्वे की ज़रूरत नहीं
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दावा (Claim) अपने-आप मिलता है
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मौसम डेटा के आधार पर तुरंत पेमेंट होता है
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किसान को कहीं चक्कर लगाने नहीं पड़ते
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| weather-related risks covered under parametric insurance |
इस लेख में हम विस्तार से समझेंगे कि किसान Weather Parametric Insurance कैसे ले सकते हैं, उन्हें किन दस्तावेज़ों की आवश्यकता होती है, कौन-कौन से Parameters उपलब्ध हैं, क्लेम कैसे मिलता है, और Rajasthan में किन जिलों में यह सेवा चल रही है।
Weather Parametric Insurance क्या है?
Weather Parametric Insurance ऐसा बीमा है जिसमें भुगतान इस पर निर्भर करता है कि मौसम का एक तय Trigger पूरा हुआ या नहीं।
जैसे:
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बारिश 50 mm से कम
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बारिश 200 mm से ज्यादा
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तापमान लगातार 40°C से ऊपर
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तेज हवा 100 km/h से अधिक
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पाला पड़ जाना
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मिट्टी की नमी एक सीमा से नीचे आना
जैसे ही Trigger पूरा होता है— किसान के खाते में सीधे पैसा भेज दिया जाता है।
फसल देखना, नुकसान साबित करना या सर्वेयर बुलाना बिल्कुल नहीं पड़ता।
किसान Weather Parametric Insurance कैसे ले सकते हैं?
यह प्रक्रिया बहुत आसान है और 5 स्टेप्स में पूरी हो जाती है।
स्टेप 1: अपने जिले में उपलब्ध बीमा कंपनी पता करें
किसान यह जानकारी आसानी से इन माध्यमों से ले सकते हैं:
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नजदीकी CSC (Common Service Center)
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Krishi Vibhag
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Gram Panchayat
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Kisan Mitra / Field Agent
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GramCover / Skymet Agent
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बीमा कंपनियों की वेबसाइट
CSC केंद्र पर जाकर केवल यह बताना होता है —
“Weather Parametric Insurance कराना है।”
स्टेप 2: फसल और मौसम Parameter का चुनाव
कंपनी के अनुसार अलग-अलग Trigger उपलब्ध होते हैं, जैसे:
बारिश आधारित ट्रिगर
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50 mm से कम बारिश → ₹10,000
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200 mm से ज्यादा बारिश → ₹15,000
तापमान आधारित ट्रिगर
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तापमान 40°C से ऊपर 3 दिन → ₹12,000
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पाला (Frost) पड़ने पर → ₹8,000
हवा की गति (Wind Speed)
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100 km/h से अधिक → ₹20,000
सूखा (Drought Index)
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मिट्टी में नमी कम → फिक्स पेमेंट
किसान अपनी फसल और जोखिम के अनुसार सबसे अच्छा कवर चुन सकते हैं।
स्टेप 3: जरूरी दस्तावेज देना
इस बीमा में बहुत कम कागज़ी काम होता है।
किसान को केवल यह देना होता है:
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आधार कार्ड
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बैंक पासबुक
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मोबाइल नंबर
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खेत का Khasra / Khatoni
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GPS लोकेशन (CSC खुद ले लेता है)
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फसल का नाम
कोई फॉर्म भरना या Photo देना आवश्यक नहीं।
स्टेप 4: प्रीमियम जमा करना
प्रीमियम अलग-अलग कंपनियों में अलग होता है, पर आमतौर पर:
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₹150 – ₹500 प्रति एकड़
कभी-कभी सरकार, NGO या Weather-Tech कंपनी Subsidy भी देती है, जिससे प्रीमियम और कम हो जाता है।
प्रीमियम जमा होते ही पॉलिसी किसान के मोबाइल नंबर पर PDF के रूप में मिल जाती है।
स्टेप 5: क्लेम अपने-आप मिलता है (No Survey Needed)
यही इस बीमा की सबसे बड़ी खासियत है।
यदि Trigger पूरा होता है:
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IMD Data
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Satellite Data
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Automatic Weather Station Data
को देखकर कंपनी अपने-आप क्लेम जारी कर देती है।
किसान को:
❌ फसल दिखानी नहीं
❌ क्लेम फॉर्म नहीं भरना
❌ सर्वेयर का इंतजार नहीं
❌ किसी ऑफिस के चक्कर नहीं
बस Trigger पूरा → पैसा बैंक खाते में।
क्लेम कैसे मिलता है? एक आसान उदाहरण
मान लीजिए किसान ने “कम बारिश” वाला कवर खरीदा है:
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Trigger: 50 mm से कम बारिश
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Payout: ₹12,000
यदि IMD डेटा दिखाता है कि:
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आपके गाँव में बारिश सिर्फ 34 mm हुई
तो:
✔ क्लेम पक्का
✔ 7–10 दिन में ₹12,000 किसान के बैंक खाते में
✔ बिना एक भी दस्तावेज़ दिए
यही इसकी ताकत है — पूरी तरह Data-Based और बिना इंसानी हस्तक्षेप।
राजस्थान में बीमा उपलब्ध
राजस्थान में फिलहाल यह योजनाएँ कई जिलों में उपलब्ध हैं, जैसे:
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Udaipur
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Rajsamand
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Banswara
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Dungarpur
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Jodhpur
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Barmer
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Jalor
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Kota
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Bundi
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Churu
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Sikar
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Alwar
इसके अलावा कई जिलों में NGO और Private Companies पायलट प्रोजेक्ट चला रही हैं।
आप अपने जिले का CSC जाकर तुरंत पता कर सकते हैं कि कौन-सी कंपनी आपके क्षेत्र में सक्रिय है।
किसानों के लिए यह बीमा क्यों जरूरी होता जा रहा है?
भारत में मौसम तेजी से बदल रहा है:
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कभी बहुत ज्यादा बारिश
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कभी एकदम सूखा
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कभी तेज हवा
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कभी अचानक ओलावृष्टि
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कभी भीषण गर्मी
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कभी पाला
ऐसे मौसम जोखिमों से फसल को भारी नुकसान होता है।
पारंपरिक फसल बीमा समय पर राहत नहीं दे पाता।
इसलिए पैरामीट्रिक मॉडल किसानों के लिए तेजी से लोकप्रिय हो रहा है।
इसके फायदे:
✔ फसल बची तो भी कवर
Trigger पूरा होने पर किसान को पैसा मिलता है → भले ही फसल सुरक्षित हो।
✔ छोटे किसानों के लिए उपयोगी
कम प्रीमियम + तेज भुगतान।
✔ मौसम आधारित सुरक्षा
मौसम बदलते ही पॉलिसी सक्रिय।
✔ बड़े किसानों के लिए भी
अगर 20–50 एकड़ है तो Total Exposure कम हो जाता है।
क्या हर किसान यह बीमा ले सकता है?
हाँ,
हर किसान — चाहे छोटे हो या बड़े — यह पॉलिसी ले सकते हैं।
जिन किसानों के पास:
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अपना खेत है
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लीज पर लिया खेत है
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या सामुदायिक खेती करते हैं
सब इस योजना के पात्र हैं।
यह बीमा केवल “जियो-लोकेशन” पर आधारित है, मतलब खेत का GPS लोकेशन दर्ज हो जाए, बस।
Parametric Insurance Crop Insurance का विकल्प
नहीं, यह उसका विकल्प नहीं बल्कि उसका पूरक (support) है।
Crop Insurance
→ फसल बर्बाद होने पर मिलता है
Parametric Insurance
→ मौसम Trigger बदलने पर मिलता है (फसल चाहे बची रहे, फिर भी पेमेंट मिलता है)
दोनों मिलकर किसान को पूरी सुरक्षा देते हैं।
किसान को यह पॉलिसी लेते समय क्या ध्यान रखना चाहिए?
कुछ महत्वपूर्ण बातें:
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Trigger Sheet को ध्यान से पढ़ें
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यह समझें कि Trigger पूरा होने पर कितनी राशि मिलेगी
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मौसम Data कहाँ से लिया जाएगा (IMD, Satellite)
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Premium कितना है
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पॉलिसी कितने महीने कवर करती है
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कौन-सी फसल / सीजन कवर है
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Payout amount फिक्स है या रेंज में
यह छोटे-छोटे पॉइंट किसान को सही निर्णय लेने में मदद करते हैं।
निष्कर्ष (Conclusion)
Weather Parametric Insurance आने वाले समय में किसानों के लिए सबसे बड़ा सुरक्षा कवच बनने वाला है। यह न केवल तेज भुगतान देता है बल्कि पूरे सिस्टम को बेहद आसान बना देता है।
राजस्थान सहित पूरे भारत में कई कंपनियाँ इसके पायलट और पॉलिसी चला रही हैं, और कुछ सालों में यह हर गाँव में उपलब्ध होगा।
अगर किसान इसे सही समय पर लें —
तो सूखा, कम बारिश, ज्यादा बारिश, गर्मी, ठंड या हवा से होने वाले नुकसान का आर्थिक बोझ काफी हद तक कम हो सकता है।
यह बीमा भारत के कृषि भविष्य के लिए एक बड़ा कदम है।

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