PM Dhan-Dhaanya Krishi Yojana 2025: चयनित जिलों की सूची, लक्ष्य, KPI और पूरी रणनीति

 by Dipansu

भारत की कृषि व्यवस्था आज सबसे बड़े संक्रमण के दौर से गुजर रही है। खेतों की उत्पादकता कई जिलों में राष्ट्रीय औसत से काफी कम है, सिंचाई की कमी है, फसल विविधीकरण सीमित है और पोस्ट-हार्वेस्ट इंफ्रास्ट्रक्चर लगभग न के बराबर है। इन चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए केंद्र सरकार ने 2025 में एक बेहद महत्वाकांक्षी योजना शुरू की— प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना (PMDDKY)

हाल ही में जारी हुआ इसका 35 पेज का Operational Guidelines PDF इस योजना का वास्तविक ढांचा प्रस्तुत करता है।

"Green agricultural field with Indian farmers working and a board showing ‘Prime Minister Dhan-Dhaanya Krishi Yojana’, representing the government’s new agriculture development programme."
PMDDKY के लिए कृषि क्षेत्र by Research cover


यह लेख इसी PDF की पूरी व्याख्या सरल और साफ भाषा में प्रस्तुत करता है, ताकि किसान, छात्र, शोधकर्ता और कृषि-सम्बंधित पाठक इस योजना को बेहतर समझ सकें।


प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना (PMDDKY)



1. PM Dhan-Dhaanya Krishi Yojana क्या है?

यह योजना देश के 100 ऐसे जिलों को विकसित करने के लिए शुरू की गई है, जहां:

  • फसल उत्पादकता कम है

  • फसल तीव्रता (cropping intensity) औसत से नीचे है

  • किसानों को ऋण (कर्ज) मिलने में कठिनाई है

  • सिंचाई और भंडारण की बड़ी कमी है

सरकार का उद्देश्य है कि आने वाले 5 साल में इन जिलों को “Aspirational Agricultural Districts” के रूप में विकसित करके कृषि उत्पादन, आय, इंफ्रास्ट्रक्चर और आधुनिक तकनीक में तेजी से सुधार किया जाए।



2. 100 जिलों का चयन कैसे हुआ?

गाइडलाइन के अनुसार जिलों का चयन 3 मानदंडों पर आधारित रहा:

  1. फसल उत्पादकता कम होना

  2. फसल विविधता व फसल तीव्रता कम होना

  3. कृषि ऋण की उपलब्धता कम होना

हर राज्य से कम से कम 1 जिला चुना गया है, और कुल 100 जिले Annexure-I में सूचीबद्ध हैं।



3. योजना का मुख्य उद्देश्य

PDF के अनुसार PMDDKY के 6 प्राथमिक लक्ष्य हैं:

1) कृषि उत्पादकता बढ़ाना

उन्नत बीज, उर्वरकों का संतुलित उपयोग, मिट्टी की जाँच, कृषि मशीनरी और आधुनिक खेती तकनीक का प्रसार।

2) फसल विविधीकरण

पारंपरिक फसलों से हटकर सब्जी, फल, तिलहन, दलहन और उच्च मूल्य वाली फसलों की ओर बढ़ावा।

3) प्राकृतिक और टिकाऊ खेती

ऑर्गेनिक व नेचुरल फार्मिंग को बढ़ावा, Integrated Pest Management और Integrated Nutrient Management।

4) पोस्ट-हार्वेस्ट स्टोरेज एवं प्रोसेसिंग

पंचायत और ब्लॉक स्तर पर वेयरहाउस, कोल्ड स्टोरेज, पैकेजिंग यूनिट और मूल्य संवर्धन सुविधाओं का विस्तार।

5) सिंचाई सुविधाओं का विस्तार

माइक्रो-इरिगेशन, पारंपरिक जलाशयों का पुनरुद्धार और “हर खेत को पानी” लक्ष्य।

6) कृषि ऋण तक सहज पहुँच

KCC कवरेज बढ़ाना, AIF के माध्यम से निवेश बढ़ाना और लघु-दीर्घकालीन ऋण उपलब्ध कराना।



4. गाइडलाइन में क्या नया है?

अन्य योजनाओं की तुलना में PMDDKY का सबसे अनोखा हिस्सा है मल्टी-मिनिस्ट्री कन्वर्जेंस मॉडल

गाइडलाइन PDF के अनुसार, 11 मंत्रालयों की लगभग 36 योजनाओं को एक ही जिले के लिए एकीकृत करके काम किया जाएगा। इनमें शामिल हैं:

  • कृषि मंत्रालय

  • जल संसाधन मंत्रालय

  • पशुपालन व डेयरी

  • मत्स्य विभाग

  • ग्रामीण विकास

  • सहकारिता मंत्रालय

  • MSME

  • खाद्य प्रसंस्करण मंत्रालय

  • भूमि संसाधन विभाग

  • कौशल विकास मंत्रालय

  • कृषि अनुसंधान (ICAR/SAU/KVK)

इस तरह पहली बार इतना बड़ा समन्वय एक कृषि योजना में शामिल किया गया है।





5. Implementation Strategy — ज़िले कैसे विकसित होंगे?

5.1 जिला स्तर पर DDKY समिति

हर जिले में Collector की अध्यक्षता में एक समिति होगी, जिसमें:

  • कृषि अधिकारी

  • मत्स्य, पशुपालन, उद्यानिकी अधिकारी

  • Lead Bank Manager

  • NABARD

  • KVK

  • दो प्रगतिशील किसान

शामिल किए जाएंगे। यही समिति हर जिले के लिए District Agriculture & Allied Sector Plan तैयार करेगी।



6. Baseline Survey — योजना का आधार

PDF के अनुसार सबसे पहले हर जिले में 9 बिंदुओं पर व्यापक baseline survey किया जाएगा:

  1. मुख्य फसलों की उत्पादकता

  2. कम उत्पादकता वाले गाँव/ब्लॉक

  3. भंडारण और कोल्ड चेन की कमी

  4. सिंचाई क्षमता

  5. मिट्टी स्वास्थ्य मानचित्र

  6. उच्च मूल्य वाली फसलें उगाने की क्षमता

  7. कृषि मशीनरी उपलब्धता

  8. किसान क्रेडिट स्थिति

  9. प्राकृतिक आपदा/पशु रोग प्रभावित क्षेत्र

Survey के आधार पर 5 साल की रणनीति तैयार होगी।




7. 5-Year Outcome Targets 

योजना पूरी तरह परिणाम-आधारित है। हर जिले को 5 साल में इन लक्ष्यों को पाना होगा:

  • फसल उत्पादकता में वृद्धि

  • फसल विविधीकरण में वृद्धि

  • माइक्रो-इरिगेशन क्षेत्र बढ़ाना

  • प्राकृतिक/ऑर्गेनिक क्षेत्र बढ़ाना

  • पशुपालन, मत्स्य और बागवानी क्षेत्र बढ़ाना

  • भंडारण क्षमता बढ़ाना

  • किसानों को ऋण उपलब्धता बढ़ाना



8. Post-Harvest Infrastructure—सबसे बड़ा फोकस

PMKSY, AIF और MIDH के फंड का उपयोग करके:

  • वेयरहाउस

  • साइलो

  • कोल्ड स्टोरेज

  • पैक हाउस

  • राइपेनिंग चैम्बर

  • लॉजिस्टिक्स हब

  • कस्टम हायरिंग सेंटर

  • ड्रोन-सेवा केंद्र

स्थापित किए जाएंगे।

यह हिस्सा PMDDKY को बाकी योजनाओं से बिल्कुल अलग बनाता है।



9. Monitoring System — NITI Aayog करेगा Ranking

PDF के अनुसार:

  • हर जिले की monthly ranking बनेगी

  • एक डिजिटल dashboard बनेगा

  • Central Nodal Officers (CNO) तैनात होंगे

  • KVK और SAU को तकनीकी भागीदार बनाया जाएगा

यह Aspirational District Programme की तरह ही मॉडल है।



10. Key Performance Indicators (KPI) — योजना का असली विज्ञान

गाइडलाइन में कुल:

  • 73 Output Indicators

  • 46 Outcome Indicators

दिए गए हैं।

उदाहरण:

  • बीज वितरण प्रतिशत

  • माइक्रो-इरिगेशन क्षेत्र

  • कस्टम हायरिंग सेंटर की संख्या

  • फसल उत्पादकता में वृद्धि

  • FPO की आय और सदस्यता

  • मछली उत्पादन

  • दूध उत्पादन

  • उर्वरक उपयोग में कमी

यह KPI-आधारित ढांचा PMDDKY को परिणाम-केंद्रित बनाता है।





11. किसानों के लिए सीधे लाभ

इस योजना से किसानों को मिलने वाले 10 प्रमुख लाभ:

  1. बेहतर बीज, उर्वरक और कृषि मशीनरी

  2. अधिक सिंचाई, कम सूखा जोखिम

  3. PMFBY के जरिए जोखिम कम

  4. KCC के जरिए सस्ता ऋण

  5. वेयरहाउस से फसल बचत

  6. प्रोसेसिंग से अच्छी कीमत

  7. फसल विविधता से ज्यादा आय

  8. प्राकृतिक खेती से मिट्टी में सुधार

  9. मार्केट लिंक और FPO से सीधी बिक्री

  10. डिजिटल कृषि ऐप से सभी जानकारी



12. योजना किन किसानों को सबसे ज्यादा फायदा देगी?

  • वर्षा आधारित खेती करने वाले किसान

  • बिना सिंचाई वाले ब्लॉक

  • दलहन/तिलहन उगाने वाले

  • बागवानी/फूल/सब्ज़ी उत्पादक

  • छोटे और सीमांत किसान

  • FPO के सदस्य किसान



13. PMDDKY क्यों जरूरी है?

भारत के 100 जिलों में:

  • फसल उत्पादकता राज्य औसत से 30–40% कम है

  • सिंचाई कवरेज कम

  • कृषि ऋण लगभग 50% किसानों तक नहीं पहुँचता

  • भंडारण क्षमता लगभग 70% कम

  • फसल विविधता न के बराबर

PMDDKY इन कमियों को दूर करने के लिए सबसे व्यापक और समन्वित योजना है।



14. निष्कर्ष — क्या PMDDKY कृषि में बदलाव ला पाएगी?

PDF में दिए गए ढांचे और multi-ministry convergence को देखते हुए यह योजना भारत के कृषि परिदृश्य में बड़ा परिवर्तन ला सकती है। अगर baseline survey मजबूत हुआ, फंड सही दिशा में खर्च हुआ, और जिला समितियाँ सक्रिय रहीं— तो 5 साल में इन जिलों की कृषि तस्वीर पूरी तरह बदल सकती है।

PMDDKY पहली ऐसी योजना है जो उत्पादकता + इंफ्रास्ट्रक्चर + क्रेडिट + तकनीक को एक साथ जोड़कर काम करती है। इसलिए यह आने वाले वर्षों में कृषि क्षेत्र में सबसे प्रभावशाली कार्यक्रम बन सकती है।


SOURCEGuidelines_PM_DDKY_19092025_Final[1]_0.pdf

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