Rajasthan Urea Solution 2025: सरकार के कदम, FMS सिस्टम और किसान गाइड | Part-3
by Dipansu
सरकार के कदम, FMS सिस्टम और किसान गाइड
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| Farmer holding urea granules symbolizing crop nutrition. |
24. सरकार ने संकट के बाद क्या–क्या कदम उठाए?
जब पूरे राजस्थान में यूरिया संकट गहराया, लाइनें लगीं, कालाबाज़ारी उजागर हुई और मीडिया में लगातार खबरें आईं — तब राज्य सरकार और केंद्र सरकार, दोनों ने मिलकर कई आपात और दीर्घकालिक कदम उठाए।
(1) अतिरिक्त रेल रैक की व्यवस्था
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केंद्र सरकार से तुरंत अतिरिक्त रेल रैक माँगे गए
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कई रैक सीधे - गुजरात, मध्यप्रदेश, उत्तर प्रदेश की फैक्ट्रियों से राजस्थान भेजे गए
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दिसंबर–जनवरी में लगभग 1 लाख मीट्रिक टन से अधिक अतिरिक्त आपूर्ति की गई
(2) जिला कलेक्टरों को विशेष अधिकार
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हर जिला कलेक्टर को यह अधिकार दिया गया कि:
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वह सीधे रैक की मॉनिटरिंग करे
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स्टॉक का जिले के अंदर पुनर्वितरण कर सके
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जिन तहसीलों में संकट ज्यादा था, वहाँ से कम जरूरत वाले क्षेत्रों से स्टॉक शिफ्ट किया गया
25. Fertilizer Monitoring System (FMS) और डिजिटल निगरानी
सरकार ने कालाबाज़ारी रोकने के लिए Fertilizer Monitoring System (FMS) को सख्ती से लागू किया।
यह सिस्टम कैसे काम करता है?
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हर यूरिया बोरे पर:
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QR कोड
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बैच नंबर
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फैक्ट्री कोड
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स्टॉक की पूरी जानकारी:
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फैक्ट्री → गोदाम → समिति → किसान ऑनलाइन दर्ज होती है
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बिना पोस मशीन एंट्री के अब किसी को बोरा देने की अनुमति नहीं
इसका फायदा:
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एक ही आधार कार्ड पर बार-बार खरीद पर रोक
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कालाबाज़ारी का ट्रैक डिजिटल रिकॉर्ड से लगने लगा
26. आधार कार्ड से बिक्री अनिवार्य क्यों की गई?
सरकार ने स्पष्ट निर्देश दिए कि:
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बिना आधार कार्ड और फसल विवरण के किसी किसान को यूरिया नहीं दिया जाएगा
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किसान को बताना होता है:
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कौन-सी फसल
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कितना रकबा
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उसी हिसाब से अधिकतम सीमा तय कर दी गई
उद्देश्य:
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बड़े किसानों द्वारा अतिरिक्त स्टॉक खरीदकर कालाबाज़ारी की रोकथाम
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वास्तविक जरूरतमंद किसान को प्राथमिकता
27. कालाबाज़ारी रोकने के लिए दंडात्मक कार्रवाई का सिस्टम
सरकार ने सभी जिलों में साफ निर्देश दिए:
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पहली बार दोषी → लाइसेंस निलंबन
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दूसरी बार दोषी → लाइसेंस रद्द
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गंभीर मामला → FIR + गिरफ्तारी
साथ ही:
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अवैध स्टॉक:
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तत्काल जब्त
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सरकारी गोदाम में सुरक्षित
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इससे कई जिलों में:
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निजी डीलरों में भय बना
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अवैध बिक्री में तेज गिरावट आई
28. किसानों के लिए सरकार की नई रणनीति (भविष्य का रोडमैप)
राजस्थान सरकार अब केवल “आपात प्रबंधन” नहीं, बल्कि दीर्घकालिक योजना पर काम कर रही है।
(1) जिला-स्तर पर स्थायी बफर स्टॉक
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हर जिले में 15–20 दिन का अनिवार्य बफर स्टॉक
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ताकि अचानक संकट की स्थिति में तुरंत वितरण शुरू हो सके
(2) निजी डीलरों की निर्भरता कम करना
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ज्यादा से ज्यादा वितरण सहकारी समितियों के माध्यम से
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निजी डीलर केवल पूरक भूमिका में
(3) स्थानीय गोदामों का विस्तार
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कई दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्रों में नए मिनी गोदाम स्वीकृत
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ट्रांसपोर्ट डिले कम होगी
29. किसान अपने स्तर पर क्या सावधानी अपनाएँ
यह हिस्सा आपके आर्टिकल का सबसे उपयोगी भाग है, क्योंकि इसे पढ़कर किसान सीधे लाभ ले सकता है।
(1) जरूरत से ज्यादा यूरिया न खरीदें
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अधिक यूरिया - फसल को नुकसान, मिट्टी की उर्वरता खराब, भविष्य में लागत बढ़ाता है
(2) हमेशा सहकारी समिति से ही खरीदें
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निजी दुकानों से - महंगा, नकली होने का खतरा
(3) हमेशा पक्का बिल लें
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बिना बिल - शिकायत दर्ज नहीं होगी, आपका कोई सबूत नहीं रहेगा
(4) ओवररेट होने पर तुरंत शिकायत करें
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जिला कृषि अधिकारी
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जिला कंट्रोल रूम
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तहसील कार्यालय
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ऑपरेशन वॉच (राज्य स्तर)
30. अगर फिर भी यूरिया न मिले तो किसान क्या करें?
अगर किसान को समय पर यूरिया नहीं मिलता:
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अपने ग्राम सेवा सहकारी समिति में लिखित आवेदन
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पटवारी या कृषि पर्यवेक्षक के पास शिकायत
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जिला कृषि अधिकारी (DAO) के कार्यालय में लिखित शिकायत
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सभी सबूत रखें:
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आधार कार्ड
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पिछली खरीद का बिल
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फसल का विवरण
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सरकारी नियमों के अनुसार शिकायत मिलने के 48–72 घंटे में जांच अनिवार्य है
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31. भविष्य में राजस्थान में यूरिया संकट
कुछ ऐसे कारण हैं जो आने वाले वर्षों में भी संकट बनाए रख सकते हैं:
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खेती का रकबा लगातार बढ़ रहा है
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रासायनिक खाद पर निर्भरता कम नहीं हो रही
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प्राकृतिक गैस की अंतरराष्ट्रीय कीमत अस्थिर
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आयात पर अत्यधिक निर्भरता
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वितरण तंत्र में अभी भी मानव-हस्तक्षेप ज्यादा
जब तक ऑर्गेनिक खेती, वैकल्पिक उर्वरक और स्थानीय उत्पादन नहीं बढ़ेंगे तब तक संकट पूरी तरह खत्म होना मुश्किल है।
32. क्या जैविक खाद (Organic Fertilizer) समाधान हो सकती है?
राजस्थान सरकार अब यह भी मान रही है कि:
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केवल रासायनिक यूरिया पर निर्भरता लंबे समय में खतरनाक, मिट्टी की सेहत खराब और पानी की मांग बढ़ती है
इसलिए वर्मी कम्पोस्ट गोबर खाद नीम कोटेड यूरिया और जैव उर्वरकों को बढ़ावा दिया जा रहा है
हालांकि:
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100% विकल्प अभी संभव नहीं लेकिन 30–40% तक निर्भरता कम की जा सकती है
33. इस पूरे संकट से सबसे बड़ा सबक
राजस्थान के यूरिया संकट ने यह साफ कर दिया कि:
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संकट केवल उत्पादन का नहीं, प्रबंधन का भी है
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सरकारी सिस्टम मजबूत है, लेकिन जमीनी निगरानी कमजोर
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कालाबाज़ारी पूरी तरह खत्म नहीं, केवल दबाई जाती है
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हर संकट में सबसे ज्यादा नुकसान छोटे और सीमांत किसानों को होता है
34. मीडिया, प्रशासन और किसान – तीनों की भूमिका
मीडिया:
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संकट को उजागर किया, दबाव बनाया और कार्रवाई संभव हुई
प्रशासन:
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देर से सही, लेकिन बड़ी कार्रवाई हुई
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FIR और जब्ती से नेटवर्क टूटा
किसान:
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संगठित होकर आवाज उठाई, विरोध किया और शिकायत की अगर तीनों सजग रहें तो कोई भी संकट स्थायी नहीं रहता
निष्कर्ष
राजस्थान में 2024–25 के दौरान जो यूरिया संकट सामने आया, वह केवल एक अस्थायी कमी नहीं थी, बल्कि यह पूरे उर्वरक वितरण तंत्र की कमजोरियों का आईना था।
एक ओर देश में उत्पादन हुआ, आयात भी हुआ और सब्सिडी भी दी गई
दूसरी ओर वितरण में गड़बड़ी, कालाबाज़ारी, फर्जी खाद और प्रशासनिक लापरवाही ने संकट को गंभीर बना दिया।
आज स्थिति काफी हद तक नियंत्रित है, लेकिन:
जब तक पारदर्शी प्रणाली, डिजिटल निगरानी और सख्त दंड एक साथ लगातार लागू नहीं रहेंगे — तब तक यह समस्या बार-बार लौटती रहेगी।
किसान की मेहनत, फसल और भविष्य — तीनों की सुरक्षा के लिए सरकार, प्रशासन और समाज तीनों की साझा जिम्मेदारी बनती है कि यूरिया जैसे जीवनदायी उर्वरक को कभी भी मुनाफे का साधन न बनने दिया जाए।

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