बॉन्ड में निवेश की पूरी गाइड: सुरक्षित रिटर्न, कम जोखिम और सही बॉन्ड चुनने का स्मार्ट तरीका
by sumer
वित्तीय बाजार में शेयरों के साथ जिस निवेश विकल्प पर सबसे अधिक भरोसा किया जाता है, वह है बॉन्ड। भारत में बदलते आर्थिक माहौल, बढ़ती ब्याज दरों और सुरक्षित निवेश की मांग में वृद्धि के कारण बॉन्ड मार्केट लगातार विस्तार कर रहा है। फिर भी, बहुत से निवेशक यह स्पष्ट रूप से नहीं समझ पाते कि बॉन्ड क्या होते हैं, वे कैसे काम करते हैं और इनमें निवेश करना कितना फायदेमंद हो सकता है।
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यह विस्तृत लेख आपको बॉन्ड की पूरी समझ देगा, ताकि आप अपने निवेश निर्णय अधिक समझदारी से ले सकें।
1. बॉन्ड क्या होते हैं
सरल शब्दों में कहा जाए तो बॉन्ड एक प्रकार का उधारपत्र होता है। जब कोई सरकार या कंपनी धन की जरूरत महसूस करती है, तो वह आम जनता या संस्थाओं से पैसा जुटाने के लिए बॉन्ड जारी करती है। निवेशक इन बॉन्ड को खरीदकर जारीकर्ता संस्था को एक तय समय के लिए धन उपलब्ध कराते हैं। इसके बदले में उन्हें निश्चित ब्याज मिलता है और परिपक्वता अवधि पूरी होने पर मूलधन वापस कर दिया जाता है।
बॉन्ड को एक लिखित समझौते के रूप में देखा जा सकता है जिसमें यह तय होता है कि निवेशक कितना पैसा देगा, उसे कितना ब्याज मिलेगा और कितने समय बाद उसकी राशि वापस की जाएगी। सुरक्षित और स्थिर आय चाहने वाले निवेशकों के लिए बॉन्ड एक भरोसेमंद साधन माने जाते हैं।
2. बॉन्ड कैसे काम करते हैं
बॉन्ड का काम करने का सिद्धांत काफी सीधा है। जब कोई निवेशक बॉन्ड खरीदता है, तो वह जारीकर्ता को निर्धारित अवधि के लिए कर्ज देता है। इस अवधि के दौरान जारीकर्ता निवेशक को हर वर्ष या हर छह महीने पर ब्याज भुगतान करता है। परिपक्वता अवधि पूरी होने पर जारीकर्ता निवेशक को उसका पूरा निवेश वापस कर देता है। बॉन्ड पर मिलने वाले ब्याज को कूपन रेट कहा जाता है।
उदाहरण के तौर पर, यदि कोई सरकार 10,000 रुपये का बॉन्ड 7 प्रतिशत ब्याज दर के साथ जारी करती है, तो निवेशक को हर वर्ष 700 रुपये ब्याज मिलेंगे। यदि बॉन्ड की परिपक्वता अवधि पांच वर्ष है, तो पाँच वर्षों बाद पूरा 10,000 रुपये वापस कर दिए जाएंगे।
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3. बॉन्ड के प्रमुख घटक
किसी भी बॉन्ड को समझने के लिए इसके मूल घटकों को समझना जरूरी है।
फेस वैल्यू - यह वह मूल राशि होती है जिसे निवेशक बॉन्ड खरीदते समय जारीकर्ता को देता है।
कूपन रेट - यह वह ब्याज दर है जिसके आधार पर निवेशक को नियमित भुगतान किया जाता है।
मॅच्योरिटी पीरियड - यह वह समय होता है जिसके बाद जारीकर्ता मूल धन वापस लौटाता है।
इश्यूअर - वह संस्था या सरकार जो बॉन्ड जारी करती है। सरकारी बॉन्ड को सबसे सुरक्षित माना जाता है, जबकि कॉर्पोरेट बॉन्ड में ब्याज अधिक लेकिन जोखिम भी ज्यादा होता है।
4. बॉन्ड के प्रकार
भारत में कई प्रकार के बॉन्ड जारी होते हैं। इनमें से कुछ प्रमुख प्रकारों के बारे में जानना जरूरी है।
4.1 सरकारी बॉन्ड
भारत सरकार या राज्य सरकारें द्वारा जारी किए जाते हैं। इन्हें सबसे सुरक्षित निवेश विकल्प माना जाता है क्योंकि सरकार के डिफॉल्ट होने की संभावना बेहद कम होती है। इन बॉन्ड से मिलने वाली ब्याज दर लगभग स्थिर रहती है और यह लंबी अवधि के लिए उपयुक्त होते हैं।
4.2 कॉर्पोरेट बॉन्ड
ये निजी या सरकारी कंपनियों द्वारा जारी किए जाते हैं। इनमें ब्याज दर अपेक्षाकृत अधिक होती है। हालांकि, अगर कंपनी आर्थिक संकट में आ जाए तो डिफॉल्ट का जोखिम भी बना रहता है।
4.3 टैक्स-फ्री बॉन्ड
कुछ सार्वजनिक कंपनियाँ जैसे NHAI, PFC, REC आदि टैक्स-फ्री बॉन्ड जारी करती हैं। इन पर मिलने वाली ब्याज राशि पर कोई कर नहीं लगता। उच्च टैक्स स्लैब वाले निवेशकों के लिए यह काफी फायदेमंद विकल्प है।
4.4 ट्रेजरी बिल्स
ये अल्पावधि सरकारी प्रतिभूतियाँ होती हैं जिनकी अवधि 91, 182 या 364 दिनों की होती है। बैंकों और संस्थागत निवेशकों के साथ अब ये आम निवेशकों के लिए भी उपलब्ध हैं।
4.5 एनसीडी (Non-Convertible Debentures)
ये कंपनियों द्वारा जारी किए जाने वाले निश्चित आय वाले साधन हैं। इनमें ब्याज दर सामान्य बॉन्ड से अधिक होती है, लेकिन जोखिम भी थोड़ा अधिक होता है।
5. बॉन्ड में निवेश क्यों करें
बॉन्ड निवेशकों को कई लाभ देते हैं, जो उन्हें एक मजबूत निवेश पोर्टफोलियो का हिस्सा बनाते हैं।
5.1 सुरक्षित निवेश
सरकारी बॉन्ड लगभग जोखिम-मुक्त माने जाते हैं। इसलिए निवेशक अपनी पूंजी को सुरक्षित रखना चाहते हैं तो बॉन्ड एक विश्वसनीय विकल्प हैं।
5.2 नियमित आय का स्रोत
कूपन भुगतान की वजह से बॉन्ड से नियमित आय मिलती रहती है। रिटायरमेंट प्लानिंग या मासिक आय चाहने वालों के लिए ये विशेष रूप से उपयोगी होते हैं।
5.3 निश्चित रिटर्न
बॉन्ड की ब्याज दर निश्चित होती है, जिससे निवेशक पहले से अनुमान लगा सकते हैं कि वे कितनी आय अर्जित कर पाएंगे।
5.4 पोर्टफोलियो में स्थिरता
अगर आपका पोर्टफोलियो शेयरों पर आधारित है, तो बॉन्ड उसमें जोखिम को कम करते हैं और स्थिरता लाते हैं।
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6. बॉन्ड में निवेश से जुड़े जोखिम
जहाँ बॉन्ड सुरक्षित माने जाते हैं, वहीं इनमें कुछ जोखिम भी होते हैं।
बाजार जोखिम - ब्याज दरों में उतार-चढ़ाव से बॉन्ड की कीमतें प्रभावित होती हैं। यदि ब्याज दरें बढ़ती हैं तो बॉन्ड के दाम घटते हैं।
क्रेडिट रिस्क - कॉर्पोरेट बॉन्ड में यह जोखिम रहता है कि कंपनी समय पर ब्याज या मूलधन न लौटा पाए।
लिक्विडिटी रिस्क - कुछ बॉन्ड का कारोबार सीमित होता है, जिससे उन्हें जल्दी बेचना कठिन हो सकता है।
7. बॉन्ड कैसे खरीदें
आज के समय में बॉन्ड खरीदना पहले की तुलना में काफी सरल हो चुका है। निवेशक कई तरीकों से बॉन्ड खरीद सकते हैं।
आरबीआई रिटेल डायरेक्ट प्लेटफॉर्म
RBI ने आम निवेशकों के लिए एक सरल प्लेटफॉर्म तैयार किया है, जहाँ से सीधे सरकारी बॉन्ड खरीदे जा सकते हैं। इसमें कोई शुल्क नहीं लगता और प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन है।
डीमैट अकाउंट के माध्यम से
Groww, Zerodha, Upstox जैसे ब्रोकर्स अपने प्लेटफॉर्म पर सरकारी और कॉर्पोरेट बॉन्ड खरीदने की सुविधा देते हैं। निवेशक यहां से कभी भी बॉन्ड खरीद या बेच सकते हैं।
विशेष बॉन्ड मार्केट प्लेटफॉर्म
IndiaBonds, GoldenPi और TheFixedIncome जैसे प्लेटफॉर्म भी बॉन्ड खरीदने-बेचने के लिए लोकप्रिय हो चुके हैं। यहाँ पर निवेशक विभिन्न प्रकार के कॉर्पोरेट बॉन्ड और एनसीडी चुन सकते हैं।
8. बॉन्ड में मिलने वाला रिटर्न
भारतीय बाजार में विभिन्न बॉन्ड निम्नलिखित रिटर्न प्रदान करते है। सरकारी बॉन्ड सामान्यत 6.5 से 7.5 प्रतिशत वर्षिक ब्याज प्रदान करते हैं। ट्रेजरी बिल्स का रिटर्न 6 से 7 प्रतिशत के बीच रहता है। टैक्स-फ्री बॉन्ड 5.5 से 6.5 प्रतिशत तक टैक्स-मुक्त ब्याज देते हैं। कॉर्पोरेट बॉन्ड 8 से 11 प्रतिशत तक रिटर्न देते हैं। एनसीडी सामान्यतः 9 से 12 प्रतिशत ब्याज प्रदान करते हैं। निवेशक अपनी जोखिम क्षमता और निवेश अवधि के अनुसार सही प्रकार का बॉन्ड चुन सकते हैं।
9. किसे बॉन्ड में निवेश करना चाहिए
बॉन्ड उन निवेशकों के लिए उपयुक्त माने जाते हैं जो सुरक्षित और निश्चित आय चाहते हैं। रिटायरमेंट की योजना बनाने वालों, शुरुआती निवेशकों, कम जोखिम उठाने वालों और अपने पोर्टफोलियो को संतुलित करने की चाहत रखने वालों के लिए बॉन्ड एक मजबूत वित्तीय साधन हैं।
निष्कर्ष
बॉन्ड वित्तीय बाजार में स्थिरता और सुरक्षा प्रदान करने वाला महत्वपूर्ण निवेश विकल्प हैं। चाहे आप अपनी पूंजी को सुरक्षित रखना चाहते हों या नियमित आय का भरोसेमंद स्रोत ढूंढ रहे हों, बॉन्ड आपकी निवेश आवश्यकताओं को अच्छी तरह पूरा कर सकते हैं। आज के समय में बॉन्ड खरीदना बेहद आसान हो चुका है और विभिन्न प्रकार के बॉन्ड उपलब्ध हैं, जो अलग-अलग निवेशकों की जरूरतों को पूरा करते हैं।
सही जानकारी और विवेकपूर्ण निर्णय के साथ बॉन्ड आपके पोर्टफोलियो में सुरक्षा और स्थिर रिटर्न का मजबूत आधार बन सकते हैं। यदि आप सुरक्षित और संतुलित निवेश रणनीति अपनाना चाहते हैं, तो बॉन्ड एक समझदारी भरा विकल्प सिद्ध हो सकते हैं।

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