कृषि से लेकर शेयर बाजार तक – वित्त मंत्रालय की रिपोर्ट में झलका भारत की मजबूती का सच

by sumer 


भारत सरकार के वित्त मंत्रालय ने हाल ही में अपनी वार्षिक रिपोर्ट 2024–25 जारी की है, जिसमें देश की आर्थिक स्थिति, विकास दर, उद्योगों, कृषि, सेवाओं, विदेशी व्यापार और वित्तीय सुधारों का विस्तृत विवरण दिया गया है। यह रिपोर्ट न केवल भारत की मजबूत आर्थिक नींव को दर्शाती है, बल्कि आने वाले वर्षों के लिए विकास के स्पष्ट संकेत भी देती है।

नीचे हम इस रिपोर्ट के प्रमुख बिंदुओं और विश्लेषण को सरल भाषा में समझते हैं।

"Businessperson analyzing India’s economic growth chart for 2024 on laptop showing rising financial bar graph and data trends in modern workspace"
Growth trends rising toward a stronger 2024



भारत की आर्थिक मजबूती: वित्त मंत्रालय की वार्षिक रिपोर्ट 2024–25



1. भारतीय अर्थव्यवस्था की गति

वित्त मंत्रालय के अनुसार, वित्त वर्ष 2024–25 में भारत की वास्तविक जीडीपी वृद्धि दर 6.4% रहने का अनुमान है। यह वृद्धि दर वैश्विक अनिश्चितताओं, भू-राजनीतिक तनावों और महंगाई दबाव के बावजूद भारत की आर्थिक मजबूती को दर्शाती है।

राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO) के पहले अग्रिम अनुमान के अनुसार, सकल मूल्य वर्धन (GVA) भी 6.4% पर रहने की संभावना है। मुख्य रूप से निर्माण, बिजली, गैस, रियल एस्टेट, और सार्वजनिक प्रशासन जैसे क्षेत्रों ने इस वृद्धि में योगदान दिया है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि निजी उपभोग व्यय (Private Final Consumption Expenditure) में 7.3% की वृद्धि दर्ज की गई, जिससे इसका हिस्सा GDP में 61.8% तक पहुंच गया — जो 2002–03 के बाद सबसे अधिक है। इसी तरह स्थिर पूंजी निर्माण (GFCF) भी 6.4% बढ़ा, जिससे निवेश और उत्पादन क्षमता में सुधार हुआ।




2. कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था

कृषि क्षेत्र ने 2023–24 में 1.4% की दर से वृद्धि दर्ज की, जबकि 2024–25 की दूसरी तिमाही में यह वृद्धि 3.5% तक रही। कुल अन्न उत्पादन 3323 लाख टन तक पहुंच गया, जो पिछले वर्ष से 26 लाख टन अधिक है।

मुख्य फसलों का प्रदर्शन:

  • चावल उत्पादन – 1378 लाख टन (20.7 लाख टन की वृद्धि)

  • गेहूं उत्पादन – 1133 लाख टन (27.4 लाख टन की वृद्धि)

  • दालें – 243 लाख टन

  • तेल बीज (ऑयलसीड्स) – 397 लाख टन

कृषि से जुड़ा पशुधन क्षेत्र भी तेजी से उभरा है। 2014–23 के बीच इस क्षेत्र की औसत वार्षिक वृद्धि दर 12.9% रही। दूध उत्पादन 146 मिलियन टन से बढ़कर 230.6 मिलियन टन हो गया है, जबकि अंडा उत्पादन 76% बढ़कर 138 अरब तक पहुंच गया।

मत्स्य क्षेत्र ने भी नया रिकॉर्ड बनाया — 183.76 लाख टन मछली उत्पादन, जो कृषि क्षेत्र में 7.3% हिस्सेदारी रखता है।



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3. औद्योगिक उत्पादन और निवेश माहौल

औद्योगिक क्षेत्र ने 2024–25 में मध्यम लेकिन स्थिर प्रदर्शन किया। औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (IIP) के अनुसार अप्रैल–नवंबर 2024 के दौरान औद्योगिक वृद्धि 4.1% रही, जबकि पिछले वर्ष 6.5% थी।

मुख्य सेक्टरों की वृद्धि दर:

  • खनन – 3.3%

  • विनिर्माण – 4.1%

  • बिजली – 5.3%

आठ प्रमुख उद्योगों (कोयला, स्टील, सीमेंट, उर्वरक, बिजली आदि) की औसत वृद्धि 4.2% रही। इससे स्पष्ट है कि भारत की औद्योगिक नींव मजबूत बनी हुई है, भले ही वैश्विक मांग में उतार-चढ़ाव देखा गया हो।

सरकार ने इन्फ्रास्ट्रक्चर निवेश, मेक इन इंडिया, और उद्योग प्रोत्साहन योजनाओं के जरिए उत्पादन को गति देने पर ध्यान केंद्रित किया है।




4. सेवा क्षेत्र: अर्थव्यवस्था की सबसे मजबूत रीढ़

सेवा क्षेत्र भारत की वृद्धि का प्रमुख इंजन बना हुआ है। 2024–25 में इस क्षेत्र की वृद्धि दर 7.2% रही।

बैंकिंग सेवाओं में 12.7% की वार्षिक वृद्धि दर्ज की गई और बैंक क्रेडिट का कुल मूल्य ₹47.8 लाख करोड़ तक पहुंच गया।


आईटी और सॉफ्टवेयर सेवाओं में निर्यात तेज़ी से बढ़ा है — Q2 FY25 में सेवा निर्यात USD 93.5 अरब तक पहुंचा, जिसमें 12.2% की सालाना वृद्धि हुई।

सेवा निर्यात का लगभग 74% हिस्सा सॉफ्टवेयर और बिज़नेस सर्विसेज से आता है, जो भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था की सफलता को दर्शाता है।



5. महंगाई और मौद्रिक स्थिति

महंगाई में सुधार का संकेत मिला है। उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) के अनुसार खुदरा महंगाई 4.9% पर आ गई है, जबकि पिछले वर्ष यह 5.4% थी। थोक मूल्य सूचकांक (WPI) पर आधारित महंगाई 2.2% रही, जो पिछले वर्ष (-0.7%) से बेहतर है।

रिज़र्व बैंक ने नीतिगत रेपो रेट 6.5% पर स्थिर रखा है और मौद्रिक नीति का रुख अब “न्यूट्रल” बना दिया है।
RBI ने FY25 की GDP वृद्धि अनुमान को 7.2% से घटाकर 6.6% किया है।



6. पूंजी बाजार और निवेशकों का भरोसा

रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय शेयर बाजार दिसंबर 2024 तक नई ऊँचाइयों पर पहुंच गया। निवेशकों की संख्या FY20 में 4.9 करोड़ थी जो अब बढ़कर 13.2 करोड़ हो चुकी है।

IPO बाज़ार में भी शानदार वृद्धि दर्ज की गई —
अप्रैल से दिसंबर 2024 के बीच 259 IPO आए (पिछले वर्ष 196 थे) और इनसे ₹1.53 लाख करोड़ से अधिक जुटाए गए।

म्यूचुअल फंड उद्योग में निवेशक भागीदारी दोगुनी हुई है। कुल AUM (एसेट अंडर मैनेजमेंट) दिसंबर 2024 में ₹66.9 लाख करोड़ तक पहुँच गया — जो मार्च 2024 की तुलना में 25% अधिक है।

रिटेल निवेशक अब भारत की वित्तीय वृद्धि के मुख्य हिस्सेदार बन चुके हैं, जिससे शेयर बाजार की गहराई और स्थिरता बढ़ी है।



7. बैंकिंग सेक्टर की सेहत

वित्त मंत्रालय की रिपोर्ट के अनुसार भारतीय बैंकों की स्थिति पिछले कुछ वर्षों में बेहद मजबूत हुई है। ग्रॉस NPA (Non-Performing Assets) घटकर 2.6% रह गया है — यह पिछले 12 वर्षों में सबसे कम स्तर है। नेट NPA 0.6% है और कैपिटल टू रिस्क वेटेड एसेट रेशियो (CRAR) 16.7% पर स्थिर है। इसका अर्थ है कि बैंकिंग प्रणाली अब पहले से कहीं अधिक लचीली और मजबूत है।

बैंक क्रेडिट ग्रोथ 11.8% रही —
MSME को दिया गया ऋण 13% बढ़ा जबकि बड़े उद्योगों को 6% की वृद्धि दर्ज हुई। कृषि ऋण में 5.1% और सेवा क्षेत्र में 5.9% की बढ़त रही।







8. विदेश व्यापार और भुगतान संतुलन

भारत का निर्यात FY25 (अप्रैल–दिसंबर) में USD 321.7 अरब रहा, जबकि आयात USD 532.5 अरब तक पहुँचा। इस प्रकार व्यापार घाटा USD 210.8 अरब रहा। हालांकि सेवा क्षेत्र की आय ने चालू खाते के घाटे को संतुलित किया। चालू खाता घाटा (CAD) 1.2% GDP के बराबर रहा।

विदेशी मुद्रा भंडार दिसंबर 2024 में USD 640 अरब पर स्थिर रहा, जबकि रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 3.8% अवमूल्यन हुआ।



9. रोजगार और श्रम बाजार में सुधार

Periodic Labour Force Survey (PLFS) 2023–24 के अनुसार, भारत की बेरोजगारी दर 2018–19 के 5.8% से घटकर 3.2% रह गई है।

श्रम भागीदारी दर (LFPR) 50.2% से बढ़कर 60.1% हो गई, और महिला श्रम भागीदारी में उल्लेखनीय सुधार हुआ — 24.5% से बढ़कर 41.7%

EPFO के आंकड़ों के अनुसार FY24 में 1.31 करोड़ नई सदस्यताएँ जुड़ीं। यह दर्शाता है कि औपचारिक रोजगार में लगातार बढ़ोतरी हो रही है।



10. जलवायु परिवर्तन और हरित विकास

भारत ने 2030 तक 2005 की तुलना में उत्सर्जन तीव्रता 45% कम करने और कुल बिजली उत्पादन का 50% गैर-जीवाश्म ईंधन स्रोतों से प्राप्त करने का लक्ष्य रखा है।

दिसंबर 2024 तक गैर-जीवाश्म ऊर्जा की हिस्सेदारी 47.1% हो चुकी है। भारत 2070 तक नेट ज़ीरो उत्सर्जन का लक्ष्य हासिल करने की दिशा में तेज़ी से आगे बढ़ रहा है।

सरकार ने “LIFE (Lifestyle for Environment)” अभियान को भी जलवायु न्याय के एक मॉडल के रूप में आगे बढ़ाया है।




11. वित्त मंत्रालय के प्रमुख विभाग

वित्त मंत्रालय छह मुख्य विभागों से मिलकर बना है —

  1. आर्थिक मामलों का विभाग (DEA) – आर्थिक नीति, बजट और निवेश प्रबंधन।

  2. व्यय विभाग (Department of Expenditure) – सरकारी खर्च और वित्तीय प्रबंधन।

  3. राजस्व विभाग (Department of Revenue) – प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष करों का प्रशासन।

  4. निवेश और सार्वजनिक परिसंपत्ति प्रबंधन विभाग (DIPAM) – सरकारी निवेश और विनिवेश नीति।

  5. वित्तीय सेवाएँ विभाग (DFS) – बैंक, बीमा और पेंशन सुधारों की देखरेख।

  6. सार्वजनिक उद्यम विभाग (DPE) – सार्वजनिक उपक्रमों की नीति और प्रदर्शन मूल्यांकन।




12. निष्कर्ष: भारत की अर्थव्यवस्था की नई उड़ान

वित्त मंत्रालय की वार्षिक रिपोर्ट 2024–25 यह स्पष्ट संकेत देती है कि भारत न केवल वैश्विक अनिश्चितताओं से उबर रहा है, बल्कि एक स्थिर और सतत विकास पथ पर आगे बढ़ रहा है।

मजबूत बैंकिंग प्रणाली, नियंत्रण में महंगाई, बढ़ते निवेश, औपचारिक रोजगार में सुधार, और सेवाओं व डिजिटल सेक्टर की तेजी से वृद्धि — ये सभी संकेत बताते हैं कि भारत आने वाले दशक में विश्व की शीर्ष तीन अर्थव्यवस्थाओं में शामिल होने की दिशा में अग्रसर है।



Source - वित्त मंत्रालय की वार्षिक रिपोर्ट 2024–25



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